Family Values
अँचरवा बिछावेनी हम
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
लेके गोदिये में बाबू के सुतावेनी हम। सूते खातिर अंचरवा बिछावेनी हम ।।
जिद्दी बहुते हऽ, बहुते ई जिद ठानेला। केतनो नीमन खेलौना से ना मानेला ।।
तब चन्दा के अकसर बोलावेनी हम ।।
छोट जेतने बा ओतने ई नटखट हवे । सिर जिद में जमीनी पर पटकत हवे ।।
प्यार से डॉटि चटकन लगावेनी हम ।।
जब केहू के लागि जाला एकरा नजर। दुआ ताबीज के भी ना होखे असर ।।
तब मथवा डिठौना लगावेनी हम ।।
बिना देखे अधीर मन हो जाला मोर। घर से चलि जाला खेले जब कवनो ओर ।।
बबुआ राजा कहिके बोलावेनी हम ।।
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जीवन परिचय
नाम : राम बहादुर 'अधीर पिण्डवी' पिता : (स्व०) श्री बसन्त पिण्डवी
दुलार के करी
हमरी माई अइसन हनके दुलार के करी। बिना स्वारथ के माई जइसन प्यार के करी ।। दुर्गा-देवी केतना देवता मनवली। तब जाके गोदिया में हमरा के पवली ।।
सगे भाई की तरे
सबकी दुख सुख में रहीं सगे भाई की तरे। तबो अरिया चलावे लोग कसाई की तरे ।। धरती की लोगवा के सुख पहुँचाईं। देके दवाई सबके रोगवा भगाईं ।।