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Family Values

अँचरवा बिछावेनी हम

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

लेके गोदिये में बाबू के सुतावेनी हम। सूते खातिर अंचरवा बिछावेनी हम ।।

जिद्दी बहुते हऽ, बहुते ई जिद ठानेला। केतनो नीमन खेलौना से ना मानेला ।।

तब चन्दा के अकसर बोलावेनी हम ।।

छोट जेतने बा ओतने ई नटखट हवे । सिर जिद में जमीनी पर पटकत हवे ।।

प्यार से डॉटि चटकन लगावेनी हम ।।

जब केहू के लागि जाला एकरा नजर। दुआ ताबीज के भी ना होखे असर ।।

तब मथवा डिठौना लगावेनी हम ।।

बिना देखे अधीर मन हो जाला मोर। घर से चलि जाला खेले जब कवनो ओर ।।

बबुआ राजा कहिके बोलावेनी हम ।।