Village Life
अंगना बंटइबे करी
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
घति जाई पिरितिया जब भाई-भाई के, लोग आपस में तोहके लड़इबे करी।
बाति मानी ना अपनी जे बाप-माई के होई फुटमति तऽ अंगना बॅटइबे करी ।।.......
सुखवा पड़ोसी के कबहू ना भावे। घर की मेहरी के रोज भड़कावे ।।
घुसी घर में तऽ अगिया लगइबे करी ।।.......
कान भरी मेहरी जो तोहे समुझाई। घरवा की लोगवा पर तोहमत लगाई ।।
मनमें फुटमति सुनिके समइबे करी ।।.......
आपन लरिकवा पियार लागी मेहरी। छोड़िके लक्ष्मी भागे लगिहें डेहरी ।।
खोट आयी सनेह घटि जइबे करी ।।...
भाई से भाई जब करी बेइमानी। आपसी विवाद बढ़ी होई परेशानी ।।
तोहार लोगवा तऽ हंसी उड़इबे करी ।।.......
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।