Official Literary Archive

राम बहादुर
अधीर पिण्डवी

कवि • गीतकार • साहित्यकार

A devoted voice of Bhojpuri and Hindi literature — preserving the soul of village life, the warmth of family, and the dignity of labour through verse.

78
Poems
7
Themes
Ram Bahadur Adheer Pindvi at the launch of गँउवाँ के माटी अनमोल
"गँउवाँ के माटी अनमोल"

— Adheer Pindvi

Selected Verses

Featured Poems

Village Life

सुधार नइखे

हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।

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Village Life

खिल उठे मनवा उदास

चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......

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Village Life

शहरिया से गाँव हो

दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।

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Devotion

बबुआ तू जान हमरो

कहली मइया हउवऽ बबुआ तूं जान हमरो। हमरी अँखिया के पुतरिया परान हमरो ।।...... सिमवां पर जइहऽ तऽ जनि घबरइह। डरि-डरि जनि तूहूं गोलिया चलइह ।।

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Farmers & Laborers

टिकुली जनि साट ऽ

कुँवारि बाडू बबुनी, टिकुली जनि साटऽ ।।....... टिकुली अउर बिदिया हऽ सुहाग के निशानी। लोगवा कही का जनि करऽ तू नादानी ।।

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Reflections

पिपरा कटाव जनि सजना

निमिया के पेड़वा लगाव ऽ, पिपरा कटाव जनि सजना। जुग जुग से होला पेड़ के पुजनवां । पेड़ की पुजनवां से बढ़े जन धनवां ।।

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गँउवाँ के माटी अनमोल — Book Cover
Published Works

गँउवाँ के माटी अनमोल

A complete Bhojpuri folk song & poetry collection — celebrating soil, family, faith, and the rhythm of rural life.