Family Values
सगे भाई की तरे
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
सबकी दुख सुख में रहीं सगे भाई की तरे। तबो अरिया चलावे लोग कसाई की तरे ।।
धरती की लोगवा के सुख पहुँचाईं। देके दवाई सबके रोगवा भगाईं ।।
केतना स्वारथी बा लोगवा बताईं के तरे ।।....
अमवा कहेला आपन रोइ के विपतिया। महुआ के नींद नाहीं आवे दिन रतिया ।।
अब रोवेले जमुनिया लुगाई की तरे ।।.......
निमिया कहेले हम हईं दुख हरनी। फायदा उठा के लोग भूलि जाला करनी ।।
हम बेनिया डोलाई रोज माई की तरे ।।...
छहियां में हमरी लोगवा जुड़ाला। फल खाके सब केहू केतना अघाला ।।
बंशी चैन के बजावे लोग कन्हाई की तरे ।।.....
एही तरे धरती के पेड़ जो कटाई। बची ना केहू विपत्ति सब पर आई।
लोगवा समझे ना बाति समुझाई के तरे ।।.......
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जीवन परिचय
नाम : राम बहादुर 'अधीर पिण्डवी' पिता : (स्व०) श्री बसन्त पिण्डवी
दुलार के करी
हमरी माई अइसन हनके दुलार के करी। बिना स्वारथ के माई जइसन प्यार के करी ।। दुर्गा-देवी केतना देवता मनवली। तब जाके गोदिया में हमरा के पवली ।।
नीक परिवार वाली
गोरिया नीक लागे छपरा बिहार वाली। बोले भोजपुरी बोलिया पियार वाली ।। सासु जी के उठि सुति छूवे चरनिया। अपनी सुहाग के भरम राखे धनिया ।।