Village Life
खिल उठे मनवा उदास
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि ।
बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
लेके कुदरिया चले खेतवा किसनवां, हरवा बैलवा के साथ।
लोटवा में पनिया लेके चले गोरिया, खुरुपी खँचोली लेइ माथ ।।
बिनि-बिनि दुबिया किसान कोड़े खेतवा, गोरिया निरावे बीनि घास ।। खिलि......
खेतवा में धनवा के बेड़ लहराला, ककड़ी के मन हुलसात।
टर-टर मेघा मधुर गीति गावे, ताल तलइया भरि जात ।।
पँखिया पसारि के नाचेले मोरनिया अपनी सजनवा के पास ।। खिलि......
अमवा के गँछिया पर झुलत दिखे गोरी, सखिया सहेलिया के साथ।
कजरी के गितिया बहुत मन भावन, मेहदी रचावे गोरे हाथ ।।
बिनु रे सजनवां के तरसेला मनवां, सुखले बीतेला सावन मास ।। खिलि......
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।
हरसे किसनवां
देखि-देखि खेतवा के हरसे किसनवां। हो जाई पूरा मन के सगरी सपनवां ।। कहेला किसान सुनु मुनुआ के माई। अबकी आपन दुख सब मिटि जाई ।।