Village Life
सुधार नइखे
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।।
पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
घर की पुरनियां की राय से चलत रहे, अब छोट-बड़ केहू में विचार नइखे ।। भाई-भाई...
बड़का पीपर, बर सब त कटाइ गइल। दुअरा के कउड़ा दुश्मनी में बुझाइ गइल ।।
एक दूसरे में भाला-बरछी तनाइ गइल, अब गउवां में बड़का इनार नइखे ।। भाई-भाई...
छोट-मोट झगड़ा सरपंच जी की माथे रहे। कोर्ट कचहरी तब केहू नाहीं जात रहे ।।
गाँव के विवाद गाँव ही में फरियात रहे, अब केहू से केहू का दरकार नइखे ।। भाई-भाई...
साल भर के झगड़ा होली में फरियात बा। रंग पिचुकारी नांही कट्टा तनात बा ।।
एक दूसरे के एक दूसरे पर घात बा, अब पहिले जइसन होली के बहार नइखे ।। । भाई-भाई..
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