Farmers & Laborers
टिकुली जनि साट ऽ
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
कुँवारि बाडू बबुनी, टिकुली जनि साटऽ ।।.......
टिकुली अउर बिदिया हऽ सुहाग के निशानी। लोगवा कही का जनि करऽ तू नादानी ।।
अपनी सनेहिया के जनि तुहू बाँटऽ ।।........
जब तोहरी शादी के लगनि धराई। दुअरा पर तोहरी बाजी शहनाई ।।
सजि धजि के अबही से रंग जनि छाँटऽ ।।.........
जगवा में तोहरो होई जग हँसाई। बाप-भाई के नाकि कटि जाई ।।
कुछू दिन अउरी समय तुहूं काटऽ ।।.........
कहत 'अधीर' मानऽ हमरो तू कहना। लाज सरम के पहिनि लऽ तू गहना ।।
हमरो कहलका पर जनि तूहू डाँटऽ ।।.......
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