Back to library
Farmers & Laborers

पतिया लिखि हो देतू

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

सुनि लेतू सखिया, हमरी मनवा के बतिया, पतिया लिखि हो देतू ।

सजना के तूहीं समुझाइ, पतिया लिखि हो देतू ।।.......

साहेब के सलाम लिखिह ऽ। नीचे हमार नाम लिखिह ऽ ।।

बिचवा में लिखिहऽ हमरी, मनवाँ के बतिया ।। पतिया.....

चढ़ते सावन सैंया घरे चलि आईं। बाटे हमार किरिया देर जनि लगाईं ।।

रुपिया ना पइसा चाहीं, ना कवनो सौगतिया ।। पतिया.........

हमरो नयनवां बरिसे जइसे सवनवां । काहे चोराइ लिहलऽ हमरो चयनवां ।।

दिनवां बीतेला कइसो, कटे नाही रतिया ।। पतिया.........

चिठिया लिखाई हम अँसुआ गिराइके। सुधियो ना लेनी परदेसवा में जाइके ।।

कवन सवतिया मरलसि, राउर बा मतिया ।। पतिया.........