Devotion
होला देवरा के आदति खराब
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
होला देवरा के आदति खराब, सासू जी तनी रउवां समुझाईं।
पीये लगने अब इहो सराब, अम्मा जी तनी रउवां समुझाईं ।।
आदति में ठेका पर गइल सुमार बा। देखीं ना अँखिया में केतना खुमार बा ।।
पाँव धरत लड़खड़ाने डगरिया। अबहीं तऽ बा इनके काँची उमरिया ।।
कहेने पियनी हैं हम तऽ दवाई। सासू जी तनी रउवां समुझाईं ।।.........
लोफर लफंगा बाने इनके संघतिया। देर से ई आवेने रोज घर रतिया ।।
अक-बक बोलें गिरत चलें रहिया। नाही बुझाता सुधिरिहें ई कहिया ।।
चारि साल फेल भइने छूटल पढ़ाई। सासू जी तनी रउवां समुझाईं ।।..........
केतनो कहीं ई तऽ कहना ना माने। हमरी बतिया पर बहुते गुसाने ।।
हमरा से इनका पटरी ना खाला। घर के ई कऽ दीहे पीके दिवाला ।।
जेट जी 'अधीर' के जल्दी बोलवाईं। सासू जी तनी रउवां समुझाईं ।।...........
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