Reflections
पिपरा कटाव जनि सजना
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
निमिया के पेड़वा लगाव ऽ, पिपरा कटाव जनि सजना।
जुग जुग से होला पेड़ के पुजनवां । पेड़ की पुजनवां से बढ़े जन धनवां ।।
नया पेड़ दुअरा लगाव, पिपरा कटाव जनि सजना ।।......
प्रदूषण बढ़ी लोग होई परेशान । हवा से चलत बा सबके परान ।।
जोखिम में जान जनि फँसाव, पिपरा कटाव जनि सजना ।।......
पेड़ हउवे जीवन में बड़ी उपयोगी। एकरी दवा से नीक हो जाला रोगी ।।
एकर गुन सबके बताव ऽ, पिपरा कटावऽ जनि सजना ।।........
तुलसी के पउधा अँगना लगाइबि । सझिया होखत हम दिअवा जराइबि ।।
सबका के तुहू समुझावऽ, पिपरा कटाक्ऽ जनि सजना ।।........
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