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Village Life

बदनाम कइसे होई

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

बगिया बबुरी लगइबऽ तऽ आम कइसे होई। साथ सन्तन के कबो बदनाम कइसे होई ।।

माई-बाप के उपकार जे भुलाई। नरको में कतहूं सरन नाही पाई ।।

बिनु सेवा के इनकी चारो धाम कइसे होई ।।....

जवनी सुरतिया पर नीयति खराब बा। मनवा के तोहरी खूलत किताब बा ।।

धागा राखी के कबो बदनाम कइसे होई ।।......

जइसन करबऽ तू कीरति कमाई। जग के लोगवा तोहार गुन गाई ।।

हीरा मटिया में रहि बेदाम कइसे होई ।।...

एक तऽ करेला, दूसरे निमिया चढ़ल । मनवा में बा तोहरी जहर भरल ।।

अधीर मनवा पर तोहरी लगाम कइसे होई ।।......