Reflections
बतिया बनावे लऽ आन की तरे
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
काहें बतिया बनावेलऽ तू आन की तरे। छुपि जालऽ दुइजिया की चान की तरे ।।
आ गइल मौसम सुहाना तू आजा। अपनी गरवा तू हमके लगा जा ।।
तोहके पुतरी में राखेनी परान की तरे ।।
कवनो अच्छा सपनवां सजावल करऽ। जनि हमरा के तू अजमावल करऽ ।।
गाड़ी जिनगी के हाँकऽ गाड़ीवान की तरे ।।.......
देखिके हमके जनि अँखिया चोरावऽ। दिलवा के बाति तनी बोल बतियावऽ ।।
पुरान राखऽ अधीर पहिचान की तरे ।।......
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