Reflections
नीक लागे बरखा बहार
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
बड़ी नीक लागे बरखा बहार गोरिया । भीगे बरखा में चुनरी तोहार गोरिया ।
कजरी बनारस के बड़ी मशहूर हऽ। घर-घर में झुलुआ झुलेके दस्तूर हऽ ।।
नीक लागेला सावन में मल्हार गोरिया ।।........
सावन में मेहदी के रंग चटकार हऽ। रतिया सुहावन नीक होत भिनुसार हऽ ।।
नीक लागेला सोरहो सिंगार गोरिया ।।......
जूही चमेली रातरानी फुलाइल। देखिके मनवा हमार हरसाइल ।।
नीक लागेला गॅछिया अनार गोरिया ।।.........
सावन सुहावन सजन संग भावे। बहे पुरुवइया तऽ मन हरसावे ।।
नीक लागेला रिमझिम फुहार गोरिया........
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पिपरा कटाव जनि सजना
निमिया के पेड़वा लगाव ऽ, पिपरा कटाव जनि सजना। जुग जुग से होला पेड़ के पुजनवां । पेड़ की पुजनवां से बढ़े जन धनवां ।।
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'अँखिया के हऊ बेटी हमरी पुतरिया, कि जिनगी के जइसे परान। बेटी रखिहऽ पगड़िया के मान ।।.......
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